श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.67.24 
स बाहू तालसङ्काशौ मुष्टीकृत्य कपीश्वर: ।
आसाद्य रोहिणीपुत्रं ताभ्यां वक्षस्यरूरुजत् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
सर्वाधिक शक्तिशाली वानर द्विविद ने अपनी ताड़-वृक्ष जैसे बड़ी भुजाओं के अंत पर मुट्ठियाँ बाँध लीं, भगवान बलराम के सामने आया और उनके शरीर पर अपने मुक्के बरसाने लगा।
 
सर्वाधिक शक्तिशाली वानर द्विविद ने अपनी ताड़-वृक्ष जैसे बड़ी भुजाओं के अंत पर मुट्ठियाँ बाँध लीं, भगवान बलराम के सामने आया और उनके शरीर पर अपने मुक्के बरसाने लगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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