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श्लोक 10.67.23  |
ततोऽमुञ्चच्छिलावर्षं बलस्योपर्यमर्षित: ।
तत्सर्वं चूर्णयामास लीलया मुषलायुध: ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| तब क्रुद्ध बन्दर ने बलराम पर पत्थरों की वर्षा की परन्तु उस गदा चलाने वाले ने सहजता से उन सभी को तोड़ दिया। |
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| तब क्रुद्ध बन्दर ने बलराम पर पत्थरों की वर्षा की परन्तु उस गदा चलाने वाले ने सहजता से उन सभी को तोड़ दिया। |
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