श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.67.2 
श्रीशुक उवाच
नरकस्य सखा कश्चिद् द्विविदो नाम वानर: ।
सुग्रीवसचिव: सोऽथ भ्राता मैन्दस्य वीर्यवान् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी बोले: द्विविद नाम का एक वानर था, जो नरकासुर का मित्र था। यह पराक्रमी द्विविद मैंद का भाई था और राजा सुग्रीव ने उसे सिखाया था।
 
श्री शुकदेव गोस्वामी बोले: द्विविद नाम का एक वानर था, जो नरकासुर का मित्र था। यह पराक्रमी द्विविद मैंद का भाई था और राजा सुग्रीव ने उसे सिखाया था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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