श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.67.11 
दुष्ट: शाखामृग: शाखामारूढ: कम्पयन् द्रुमान् ।
चक्रे किलकिलाशब्दमात्मानं सम्प्रदर्शयन् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
वह शरारती बंदर पेड़ की एक शाखा पर चढ़ गया और फिर पेड़ों को हिलाते हुए और किलकिली मचाते हुए अपनी उपस्थिति जताने लगा ।
 
वह शरारती बंदर पेड़ की एक शाखा पर चढ़ गया और फिर पेड़ों को हिलाते हुए और किलकिली मचाते हुए अपनी उपस्थिति जताने लगा ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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