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श्लोक 10.67.1  |
श्रीराजोवाच
भुयोऽहं श्रोतुमिच्छामि रामस्याद्भुतकर्मण: ।
अनन्तस्याप्रमेयस्य यदन्यत् कृतवान् प्रभु: ॥ १ ॥ |
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| अनुवाद |
| यशस्वी राजा परीक्षित बोले: मैं अनन्त तथा अपार भगवान् श्रीबलराम के विषय में और आगे सुनना चाहता हूँ, जिनके सभी कार्य विस्मयकारी हैं। उन्होंने और क्या-क्या किया? |
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| यशस्वी राजा परीक्षित बोले: मैं अनन्त तथा अपार भगवान् श्रीबलराम के विषय में और आगे सुनना चाहता हूँ, जिनके सभी कार्य विस्मयकारी हैं। उन्होंने और क्या-क्या किया? |
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