| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 10.65.3  | चिरं न: पाहि दाशार्ह सानुजो जगदीश्वर: ।
इत्यारोप्याङ्कमालिङ्ग्य नेत्रै: सिषिचतुर्जलै: ॥ ३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | [नन्द और यशोदा ने प्रार्थना की] : "हे दशार्ह वंशज, हे ब्रह्माण्ड के स्वामी, तुम और तुम्हारे छोटे भाई कृष्ण हमेशा हमारी रक्षा करते रहें।" यह कह कर उन्होंने श्री बलराम को गोद में उठा लिया, उन्हें गले लगाया और अपनी आँखों के आँसुओं से उन्हें नहला दिया। | | | | [नन्द और यशोदा ने प्रार्थना की] : "हे दशार्ह वंशज, हे ब्रह्माण्ड के स्वामी, तुम और तुम्हारे छोटे भाई कृष्ण हमेशा हमारी रक्षा करते रहें।" यह कह कर उन्होंने श्री बलराम को गोद में उठा लिया, उन्हें गले लगाया और अपनी आँखों के आँसुओं से उन्हें नहला दिया। | | ✨ ai-generated | | |
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