Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.65.29: हे प्रभु मोहे छोड़ दो। हे ब्रह्माण्ड की आत्मा, मैं भगवान के रूप में आपके पद को नहीं जानती थी किन्तु अब मैं आपके चरणों में समर्पित हूँ और आप अपने भक्तों पर सदैव दयालु रहते हैं। | bhagavat अध्याय 10.65: बलराम का वृन्दावन जाना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु मोहे छोड़ दो। हे ब्रह्माण्ड की आत्मा, मैं भगवान के रूप में आपके पद को नहीं जानती थी किन्तु अब मैं आपके चरणों में समर्पित हूँ और आप अपने भक्तों पर सदैव दयालु रहते हैं।
O Lord, please let me go. O Soul of the universe, I did not know Your position as the Supreme Personality of Godhead, but now I have taken refuge in You, and You are always merciful to Your devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥