श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.65.22 
नेदुर्दुन्दुभयो व्योम्नि ववृषु: कुसुमैर्मुदा ।
गन्धर्वा मुनयो रामं तद्वीर्यैरीडिरे तदा ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
उस समय आकाश में दुंदुभियाँ बज उठीं और गंधर्वों ने हर्षपूर्वक पुष्पवर्षा की, और मुनियों ने भगवान बलराम के वीरतापूर्ण कार्यो की स्तुति की।
 
At that time, drums resounded in the sky, the Gandharvas showered flowers in joy, and the sages praised the heroic deeds of Lord Balarama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)