श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.65.21 
उपगीयमानो गन्धर्वैर्वनिताशोभिमण्डले ।
रेमे करेणुयूथेशो माहेन्द्र इव वारण: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
जब गंधर्वगण उनकी कीर्ति गा रहे थे तब भगवान बलराम तेजस्वी युवतियों के घेरे में लीन होकर आनंद ले रहे थे। वे इन्द्र के शानदार हाथी ऐरावत की तरह प्रतीत हो रहे थे, जो हथनियों के झुंड के बीच विचरण कर रहा हो।
 
जब गंधर्वगण उनकी कीर्ति गा रहे थे तब भगवान बलराम तेजस्वी युवतियों के घेरे में लीन होकर आनंद ले रहे थे। वे इन्द्र के शानदार हाथी ऐरावत की तरह प्रतीत हो रहे थे, जो हथनियों के झुंड के बीच विचरण कर रहा हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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