श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.65.20 
तं गन्धं मधुधाराया वायुनोपहृतं बल: ।
आघ्रायोपगतस्तत्र ललनाभि: समं पपौ ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
वायु उस मधुर पेय के झरने की सुगंध को बलराम के पास ले गई और जब उन्होंने उसे सूँघा तो वे (पेड़ के पास) गए। वहाँ उन्होंने और उनकी संगिनियों ने उसे पिया।
 
वायु उस मधुर पेय के झरने की सुगंध को बलराम के पास ले गई और जब उन्होंने उसे सूँघा तो वे (पेड़ के पास) गए। वहाँ उन्होंने और उनकी संगिनियों ने उसे पिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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