Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.65.11-12: "हे दाशार्ह, हमने कृष्ण की खातिर अपनी माताओं, पिताओं, भाइयों, पतियों, पुत्रों और बहनों का भी त्याग कर दिया, यद्यपि इन पारिवारिक सम्बन्धों का परित्याग कर पाना बड़ा कठिन है। किन्तु हे प्रभु, अब वही कृष्ण अचानक हम सबों को छोड़कर हमारे साथ के सारे स्नेह बन्धनों को तोड़कर चले गए हैं। ऐसी स्थिति में कोई स्त्री उनके विश्वास पर भरोसा कैसे कर सकती है?" | bhagavat अध्याय 10.65: बलराम का वृन्दावन जाना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"हे दाशार्ह, हमने कृष्ण की खातिर अपनी माताओं, पिताओं, भाइयों, पतियों, पुत्रों और बहनों का भी त्याग कर दिया, यद्यपि इन पारिवारिक सम्बन्धों का परित्याग कर पाना बड़ा कठिन है। किन्तु हे प्रभु, अब वही कृष्ण अचानक हम सबों को छोड़कर हमारे साथ के सारे स्नेह बन्धनों को तोड़कर चले गए हैं। ऐसी स्थिति में कोई स्त्री उनके विश्वास पर भरोसा कैसे कर सकती है?"
“O Dasharha, we have abandoned our mothers, fathers, brothers, husbands, sons and sisters for the sake of Krishna, although it is difficult to abandon these family relationships. But now, O Lord, the same Krishna has suddenly abandoned us all, breaking all bonds of affection with us and has gone away. And in such a situation how can a woman trust his promises?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥