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श्रीशुक उवाच
इति स्म राजा सम्पृष्ट: कृष्णेनानन्तमूर्तिना ।
माधवं प्रणिपत्याह किरीटेनार्कवर्चसा ॥ ९ ॥
अनुवाद
शुकदेव जी कहते हैं कि अनंत रूप वाले कृष्ण के इस प्रकार पूछने पर सूर्य के समान चमकता मुकुट पहने हुए राजा ने माधव को नमन किया और इस प्रकार बोला।
Sukadeva Goswami said: Being thus questioned by Krsna of infinite form, the king with a crown gleaming like the sun bowed to Madhava and spoke as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥