स उत्तम:श्लोककराभिमृष्टो
विहाय सद्य: कृकलासरूपम् ।
सन्तप्तचामीकरचारुवर्ण:
स्वर्ग्यद्भुतालङ्करणाम्बरस्रक् ॥ ६ ॥
अनुवाद
यशस्वी भगवान के हाथों के स्पर्श से, उस प्राणी ने तुरंत छिपकली के अपने रूप को त्याग दिया और स्वर्ग के वासी का रूप धारण कर लिया। उसका रंग पिघले सोने जैसा सुंदर था और वह अद्भुत गहनों, वस्त्रों और मालाओं से सजाया गया था।
Upon receiving the touch of the glorious Lord's hands the creature instantly gave up its lizard-like form and assumed the form of a heavenly dweller. His complexion was as beautiful as molten gold and he was decked with wonderful ornaments, clothes and garlands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥