Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.64.39: चाहे वह उस ब्राह्मण की स्वयं की दी हुई दान की वस्तु हो या किसी अन्य की, जो व्यक्ति किसी ब्राह्मण की संपत्ति की चोरी करता है, उसे साठ हजार वर्षों तक मल में कीड़े के रूप में जन्म लेना पड़ेगा । | bhagavat अध्याय 10.64: राजा नृग का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चाहे वह उस ब्राह्मण की स्वयं की दी हुई दान की वस्तु हो या किसी अन्य की, जो व्यक्ति किसी ब्राह्मण की संपत्ति की चोरी करता है, उसे साठ हजार वर्षों तक मल में कीड़े के रूप में जन्म लेना पड़ेगा ।
A person who steals the property of a brahmin, whether it is his own donation or that of someone else, will be born as an insect in feces for sixty thousand years
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥