Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.64.18: जैसे ही दोनों ब्राह्मण झगड़ रहे थे, हर एक अपने प्रयोजन को पूरा करने का भरपूर प्रयास कर रहा था, वे मेरे पास पहुँचे। उनमें से एक ने कहा, "आपने यह गाय मुझे दी" और दूसरे ने कहा, "लेकिन आपने उसे मुझसे चुराया।" यह सुनकर मैं चकरा गया। | bhagavat अध्याय 10.64: राजा नृग का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे ही दोनों ब्राह्मण झगड़ रहे थे, हर एक अपने प्रयोजन को पूरा करने का भरपूर प्रयास कर रहा था, वे मेरे पास पहुँचे। उनमें से एक ने कहा, "आपने यह गाय मुझे दी" और दूसरे ने कहा, "लेकिन आपने उसे मुझसे चुराया।" यह सुनकर मैं चकरा गया।
The two brahmins came to me quarrelling, each of them striving hard to achieve his own purpose. One of them said, "You gave me this cow" and the other said, "But you stole it from me." I was confused at this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥