श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.63.39 
यथैव सूर्य: पिहितश्छायया स्वया
छायां च रूपाणि च सञ्चकास्ति ।
एवं गुणेनापिहितो गुणांस्त्व-
मात्मप्रदीपो गुणिनश्च भूमन् ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हे परमेश्वर, जिस तरह सूर्य बादल के आवरण में होने पर भी स्वयं अपनी चमक से बादल और अन्य दृश्य रूपों को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार आप भौतिक गुणों से ढके होने पर भी स्वयं प्रकाशमय बने रहते हैं और उन भौतिक गुणों को, और उन गुणों से युक्त जीवों को भी, प्रकट करते हैं।
 
O Almighty, just as the sun, even when covered by clouds, illuminates the clouds and all other visible forms, so You, even when covered by material qualities, remain Yourself illuminated and manifest all those qualities along with the living entities endowed with those qualities.
तात्पर्य
यहाँ भगवान शिव पिछले श्लोक की अंतिम दो पंक्तियों में व्यक्त विचार को और स्पष्ट करते हैं। बादलों और सूर्य के सादृश्य उपयुक्त है। अपनी ऊर्जा से सूर्य बादल बनाता है, जो सूर्य के हमारे दृष्टिकोण को ढकते हैं। फिर भी यह सूर्य ही है जो हमें बादलों और अन्य सभी चीजों को भी देखने की अनुमति देता है। इसी तरह, भगवान अपनी भ्रामक शक्ति का विस्तार करते हैं और इस प्रकार हमें उन्हें सीधे देखने से रोकते हैं। फिर भी यह केवल ईश्वर ही हैं जो हमें उनकी आवरण शक्ति को प्रकट करते हैं - अर्थात् भौतिक दुनिया - और इस प्रकार भगवान आत्म-प्रदीप हैं, "स्व-प्रकाशमान"। यह उनके अस्तित्व की वास्तविकता है जो सभी चीजों को दृश्यमान बनाती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)