श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.62.9 
इत्युक्त: कुमतिर्हृष्ट: स्वगृहं प्राविशन्नृप ।
प्रतीक्षन् गिरिशादेशं स्ववीर्यनशनं कुधी: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसी सलाह के बाद, नासमझ बाणासुर खुश हो गया। तत्पश्चात् हे राजन, गिरीश ने जो भविष्यवाणी की थी, उसके विनाश की प्रतीक्षा में, वह अपने घर चला गया।
 
ऐसी सलाह के बाद, नासमझ बाणासुर खुश हो गया। तत्पश्चात् हे राजन, गिरीश ने जो भविष्यवाणी की थी, उसके विनाश की प्रतीक्षा में, वह अपने घर चला गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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