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श्लोक 10.62.6  |
दो:सहस्रं त्वया दत्तं परं भाराय मेऽभवत् ।
त्रिलोक्यां प्रतियोद्धारं न लभे त्वदृते समम् ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| आपने मुझे दी हुई ये एक हज़ार भुजाएँ मेरे लिए सिर्फ एक भारी बोझ हैं। तीनों लोकों में मैं आप के अलावा लड़ने लायक कोई नहीं पा रहा हूँ। |
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| आपने मुझे दी हुई ये एक हज़ार भुजाएँ मेरे लिए सिर्फ एक भारी बोझ हैं। तीनों लोकों में मैं आप के अलावा लड़ने लायक कोई नहीं पा रहा हूँ। |
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