श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.62.4 
स एकदाह गिरिशं पार्श्वस्थं वीर्यदुर्मद: ।
किरीटेनार्कवर्णेन संस्पृशंस्तत्पदाम्बुजम् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
बाणासुर अपनी शक्ति के मद में चूर था। जब एक दिन शिवजी उसकी बगल में खड़े थे, तो बाणासुर ने अपने सूरज की तरह जगमगाते मुकुट से उनके चरणकमलों का स्पर्श किया और उनसे इस प्रकार कहा।
 
बाणासुर अपनी शक्ति के मद में चूर था। जब एक दिन शिवजी उसकी बगल में खड़े थे, तो बाणासुर ने अपने सूरज की तरह जगमगाते मुकुट से उनके चरणकमलों का स्पर्श किया और उनसे इस प्रकार कहा।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas