श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.62.3 
भगवान् सर्वभूतेश: शरण्यो भक्तवत्सल: ।
वरेण छन्दयामास स तं वव्रे पुराधिपम् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
सभी प्राणियों के स्वामी, अपने भक्तों के दयालु रक्षक ने बाणासुर को उसका मनपसंद वर देकर बहुत प्रसन्न किया। बाण ने उन्हें (भगवान शिवजी को) अपने शहर के रक्षक के रूप में चुना।
 
सभी प्राणियों के स्वामी, अपने भक्तों के दयालु रक्षक ने बाणासुर को उसका मनपसंद वर देकर बहुत प्रसन्न किया। बाण ने उन्हें (भगवान शिवजी को) अपने शहर के रक्षक के रूप में चुना।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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