श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.62.28 
तत: प्रव्यथितो बाणो दुहितु: श्रुतदूषण: ।
त्वरित: कन्यकागारं प्राप्तोऽद्राक्षीद् यदूद्वहम् ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
यदुओं की शान, अनिरुद्ध को देखकर बाणासुर अपनी पुत्री के भ्रष्टाचार के बारे में सुनकर बेहद आंदोलित हो गया और एक बार में ही कुमारियों के आवास की ओर भागा।
 
यदुओं की शान, अनिरुद्ध को देखकर बाणासुर अपनी पुत्री के भ्रष्टाचार के बारे में सुनकर बेहद आंदोलित हो गया और एक बार में ही कुमारियों के आवास की ओर भागा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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