श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.62.22 
सा च तं सुन्दरवरं विलोक्य मुदितानना ।
दुष्प्रेक्ष्ये स्वगृहे पुम्भी रेमे प्राद्युम्निना समम् ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
जब ऊषा ने पुरुषों में सबसे सुंदर उस पुरुष को देखा तो खुशी से उसका चेहरा चमक उठा। वह प्रद्युम्न के पुत्र को अपने निजी कक्ष में ले गई जहाँ पुरुषों को देखने तक की मनाही थी और वहाँ उसने उसके साथ रमण किया।
 
जब ऊषा ने पुरुषों में सबसे सुंदर उस पुरुष को देखा तो खुशी से उसका चेहरा चमक उठा। वह प्रद्युम्न के पुत्र को अपने निजी कक्ष में ले गई जहाँ पुरुषों को देखने तक की मनाही थी और वहाँ उसने उसके साथ रमण किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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