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श्लोक 10.62.21  |
तत्र सुप्तं सुपर्यङ्के प्राद्युम्निं योगमास्थिता ।
गृहीत्वा शोणितपुरं सख्यै प्रियमदर्शयत् ॥ २१ ॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ उसने प्रद्युम्न के बेटे अनिरुद्ध को एक खूबसूरत बिस्तर पर सोते हुए पाया। उसे वह अपनी योगशक्ति के सहारे शोणितपुर ले गई जहाँ उसने अपनी सहेली ऊषा को उसका प्रियतम भेंट कर दिया। |
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| वहाँ उसने प्रद्युम्न के बेटे अनिरुद्ध को एक खूबसूरत बिस्तर पर सोते हुए पाया। उसे वह अपनी योगशक्ति के सहारे शोणितपुर ले गई जहाँ उसने अपनी सहेली ऊषा को उसका प्रियतम भेंट कर दिया। |
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