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श्लोक 10.62.20  |
चित्रलेखा तमाज्ञाय पौत्रं कृष्णस्य योगिनी ।
ययौ विहायसा राजन् द्वारकां कृष्णपालिताम् ॥ २० ॥ |
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| अनुवाद |
| चित्रलेखा ने अपनी योग शक्ति से उसे कृष्ण के पोते (अनिरुद्ध) के रूप में पहचान लिया। हे राजन! तब वह आकाश-मार्ग से द्वारका नगरी चली गई जो कृष्ण के संरक्षण में थी। |
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| चित्रलेखा ने अपनी योग शक्ति से उसे कृष्ण के पोते (अनिरुद्ध) के रूप में पहचान लिया। हे राजन! तब वह आकाश-मार्ग से द्वारका नगरी चली गई जो कृष्ण के संरक्षण में थी। |
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