श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.62.11 
सा तत्र तमपश्यन्ती क्व‍ासि कान्तेति वादिनी ।
सखीनां मध्य उत्तस्थौ विह्वला व्रीडिता भृशम् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
सपने में उन्हें न पाकर, ऊषा अचानक अपनी सहेलियों के बीच चिल्लाते हुए उठ बैठी, "कहाँ हो मेरे प्यारे?" वह बहुत परेशान और बेचैन थी।
 
सपने में उन्हें न पाकर, ऊषा अचानक अपनी सहेलियों के बीच चिल्लाते हुए उठ बैठी, "कहाँ हो मेरे प्यारे?" वह बहुत परेशान और बेचैन थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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