श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 61: बलराम द्वारा रुक्मी का वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.61.22 
श्रीशुक उवाच
वृत: स्वयंवरे साक्षादनङ्गोऽङ्गयुतस्तया ।
राज्ञ: समेतान् निर्जित्य जहारैकरथो युधि ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा: अपने स्वयंवर उत्सव में रुक्मावती ने स्वयं ही प्रद्युम्न को चुना, जो कि साक्षात कामदेव थे। तब सिर्फ़ एक अकेले रथ पर युद्ध करते हुए भी प्रद्युम्न ने इकट्ठा हुए राजाओं को युद्ध में हराया और रुक्मावती को साथ ले गए।
 
श्री शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा: अपने स्वयंवर उत्सव में रुक्मावती ने स्वयं ही प्रद्युम्न को चुना, जो कि साक्षात कामदेव थे। तब सिर्फ़ एक अकेले रथ पर युद्ध करते हुए भी प्रद्युम्न ने इकट्ठा हुए राजाओं को युद्ध में हराया और रुक्मावती को साथ ले गए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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