श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 61: बलराम द्वारा रुक्मी का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.61.16 
वृको हर्षोऽनिलो गृध्रो वर्धनोन्नाद एव च ।
महांस: पावनो वह्निर्मित्रविन्दात्मजा: क्षुधि: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
मित्रविन्दा के पुत्र थे: वृक, हर्ष, अनिल, गृध्र, वर्धन, उन्नाद, महांस, पावन, वह्नि और क्षुधि।
 
मित्रविन्दा के पुत्र थे: वृक, हर्ष, अनिल, गृध्र, वर्धन, उन्नाद, महांस, पावन, वह्नि और क्षुधि।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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