श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 61: बलराम द्वारा रुक्मी का वध  »  श्लोक 10-12
 
 
श्लोक  10.61.10-12 
भानु: सुभानु: स्वर्भानु: प्रभानुर्भानुमांस्तथा ।
चन्द्रभानुर्बृहद्भ‍ानुरतिभानुस्तथाष्टम: ॥ १० ॥
श्रीभानु: प्रतिभानुश्च सत्यभामात्मजा दश ।
साम्ब: सुमित्र: पुरुजिच्छतजिच्च सहस्रजित् ॥ ११ ॥
विजयश्चित्रकेतुश्च वसुमान् द्रविड: क्रतु: ।
जाम्बवत्या: सुता ह्येते साम्बाद्या: पितृसम्मता: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
सत्यभामा के दस पुत्र थे- भानु, सुभानु, स्वर्भानु, प्रभानु, भानुमान, चन्द्रभानु, वृहद्भानु, अतिभानु (आठवाँ), श्रीभानु और प्रतिभानु। जाम्बवती के पुत्रों में साम्ब, सुमित्र, पुरुजित, शतजित, सहस्रजित, विजय, चित्रकेतु, वसुमान, द्रविड़ और क्रतु शामिल हैं। ये दसों पुत्र, साम्ब का नेतृत्व करते थे और वे अपने पिता के सबसे चहेते थे।
 
सत्यभामा के दस पुत्र थे- भानु, सुभानु, स्वर्भानु, प्रभानु, भानुमान, चन्द्रभानु, वृहद्भानु, अतिभानु (आठवाँ), श्रीभानु और प्रतिभानु। जाम्बवती के पुत्रों में साम्ब, सुमित्र, पुरुजित, शतजित, सहस्रजित, विजय, चित्रकेतु, वसुमान, द्रविड़ और क्रतु शामिल हैं। ये दसों पुत्र, साम्ब का नेतृत्व करते थे और वे अपने पिता के सबसे चहेते थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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