श्रीशुक उवाच
इति प्रणयबद्धाभिर्गोपीभि: कृतरक्षणम् ।
पाययित्वा स्तनं माता सन्न्यवेशयदात्मजम् ॥ ३० ॥
अनुवाद
श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : माता यशोदा समेत सारी गोपियाँ मातृस्नेह से बँधी हुई थीं। इस तरह बालक की रक्षा के लिए मंत्रोच्चारण के बाद माता यशोदा ने बच्चे को अपना दूध पिलाया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया।
Srila Sukadeva Goswami further said: All the gopis including mother Yashoda were bound by maternal love. Thus, after chanting mantras to protect the child, mother Yashoda fed the child with her milk and laid him on the bed.
तात्पर्य
जब कोई बच्चा अपनी माँ के स्तनों से दूध पीता है तो इसे उसके स्वास्थ्य का अच्छा संकेत माना जाता है। इसलिए वृद्ध गोपियों को कृष्ण को सुरक्षा प्रदान करने के लिए मन्त्रों का जाप करने भर से संतुष्टि नहीं होती थी; वे अपने बच्चे के स्वास्थ्य की भी परीक्षा लेती थीं। जब बच्चा स्तन चूसता था, तो इससे उनके स्वास्थ्य की पुष्टि होती थी और जब गोपियाँ पूर्ण रूप से संतुष्ट हो जाती थीं, तो वे बच्चे को उसके बिस्तर पर लिटा देती थीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥