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bhagavat 10.59.40: एक बार लगवाए जाने पर पारिजात वृक्ष ने रानी सत्यभामा के महल के बाग में सुंदरता ला दी। वृक्ष की खुशबू और स्वादिष्ट रस के लालच में भौंरे स्वर्ग से ही उसका पीछा कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.59.40 
स्थापित: सत्यभामाया गृहोद्यानोपशोभन: ।
अन्वगुर्भ्रमरा: स्वर्गात् तद्गन्धासवलम्पटा: ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
एक बार लगवाए जाने पर पारिजात वृक्ष ने रानी सत्यभामा के महल के बाग में सुंदरता ला दी। वृक्ष की खुशबू और स्वादिष्ट रस के लालच में भौंरे स्वर्ग से ही उसका पीछा कर रहे थे।
 
Once planted, the Parijat tree made the garden of Queen Satyabhama's palace beautiful. The bumble bees, greedy for the fragrance and sweet nectar of this tree, started chasing it from heaven itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)