श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.59.33 
तत्र राजन्यकन्यानां षट्‍सहस्राधिकायुतम् ।
भौमाहृतानां विक्रम्य राजभ्यो दद‍ृशे हरि: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भगवान् कृष्ण ने सोलह हजार राजकुमारियों को देखा, जिन्हें भौम ने जबरदस्ती विभिन्न राजाओं से छीन लिया था।
 
There Lord Krishna saw more than sixteen thousand princesses who had been forcibly taken away by Bhauma from various kings.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी, विष्णु पुराण (5.29.31) में उद्धृत ऋषि पराशर के प्रमाण देते हैं, जिसका प्रभाव यह था कि भौम के महल में वास्तव में 16,100 शाही कुंवारियां कैद थीं:

"कन्या-पुरे स कन्यानाम्

षोडशा तुल्य-विक्रमः

शताधिकानि ददृशे

सहस्राणि महा-मते"

"ओ बुद्धिमान, कुंवारी कन्याओं के कक्ष में उस अद्वितीय prowess के भगवान ने 16,100 राजकुमारियों को पाया।"

विष्णु पुराण (5.29.9) का एक और प्रासंगिक श्लोक इस प्रकार है:

"देव-सिद्धासुरादीनाम्

नृपानाम् च जनार्दन

हृत्वा हि सोऽसुरः कन्या

रुरोध निज-मंदिरे"

"दानव [भौमासुर] ने देवताओं, सिद्धों, असुरों और राजाओं की अविवाहित बेटियों का अपहरण कर लिया, हे जनार्दन, और उन्हें अपने महल में कैद कर लिया।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)