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bhagavat 10.59.32: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस प्रकार विनीत भक्ति के शब्दों से भूमि देवी द्वारा प्रार्थना किए जाने पर परमेश्वर ने उसके पोते को अभय प्रदान किया और तब भौमासुर के महल में प्रवेश किया जो विविध प्रकार के ऐश्वर्य से पूर्ण था।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.59.32 
श्रीशुक उवाच
इति भूम्यर्थितो वाग्भिर्भगवान् भक्तिनम्रया ।
दत्त्वाभयं भौमगृहं प्राविशत् सकलर्द्धिमत् ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस प्रकार विनीत भक्ति के शब्दों से भूमि देवी द्वारा प्रार्थना किए जाने पर परमेश्वर ने उसके पोते को अभय प्रदान किया और तब भौमासुर के महल में प्रवेश किया जो विविध प्रकार के ऐश्वर्य से पूर्ण था।
 
Sukadeva Goswami said: Thus prayed by Bhumi Devi with words of humble devotion, the Supreme Lord granted protection to her grandson and then entered the palace of Bhaumaasur which was filled with all kinds of opulences.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)