Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.58.6: सात्यकि ने भी पांडवों से पूजा और स्वागत प्राप्त करके एक सम्मानजनक आसन ग्रहण किया और भगवान के अन्य साथी भी उचित सम्मान प्राप्त करके अलग-अलग स्थानों पर बैठ गए। | bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैव सात्यकि: पार्थै: पूजितश्चाभिवन्दित: ।
निषसादासनेऽन्ये च पूजिता: पर्युपासत ॥ ६ ॥
अनुवाद
सात्यकि ने भी पांडवों से पूजा और स्वागत प्राप्त करके एक सम्मानजनक आसन ग्रहण किया और भगवान के अन्य साथी भी उचित सम्मान प्राप्त करके अलग-अलग स्थानों पर बैठ गए।
Satyaki too, after receiving worship and welcome from the Pandavas, took a seat of respect and other companions of the Lord also, after receiving due respect, sat at various places.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥