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bhagavat 10.58.35: कोशल नरेश ने भगवान कृष्ण को देखते ही प्रसन्नता से अपने सिंहासन से उठकर उनका अभिनंदन किया और उन्हें एक सम्मानित स्थान तथा पर्याप्त उपहार भेंट किए। भगवान कृष्ण ने भी राजा को आदरपूर्ण ढंग से नमस्कार किया।   |   bhagavat अध्याय 10.58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण का पाँच राजकुमारियों से विवाह  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.58.35 
स कोशलपति: प्रीत: प्रत्युत्थानासनादिभि: ।
अर्हणेनापि गुरुणा पूजयन् प्रतिनन्दित: ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
कोशल नरेश ने भगवान कृष्ण को देखते ही प्रसन्नता से अपने सिंहासन से उठकर उनका अभिनंदन किया और उन्हें एक सम्मानित स्थान तथा पर्याप्त उपहार भेंट किए। भगवान कृष्ण ने भी राजा को आदरपूर्ण ढंग से नमस्कार किया।
 
The king of Kosala was delighted to see Krishna. He rose from his throne and worshipped Lord Krishna by offering him a prestigious position and abundant gifts. Lord Krishna also greeted the king respectfully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)