श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  10.54.52 
अहत्वा दुर्मतिं कृष्णमप्रत्यूह्य यवीयसीम् ।
कुण्डिनं न प्रवेक्ष्यामीत्युक्त्वा तत्रावसद् रुषा ॥ ५२ ॥
 
 
अनुवाद
चूँकि उसने प्रतिज्ञा की थी कि "जब तक दुष्ट कृष्ण को मारकर अपनी छोटी बहन को वापस नहीं ले आता तब तक मैं कुण्डिन में प्रवेश नहीं करूँगा" इसलिए रुक्मी हताश होकर उसी स्थान पर रहने लगा।
 
Since he had vowed that “I will not enter Kundin until I kill the evil Krishna and bring back my younger sister”, Rukmi became dejected and started living at the same place.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती स्पष्ट करते हैं कि भोज शब्द का मतलब है "अनुभव" और नानार्थ-वर्ग शब्दकोश के अनुसार, कटः का मतलब है "प्रतिज्ञा"। इस प्रकार भोजकट वो स्थान है जहां रुकमी को अपनी प्रतिज्ञा के परिणामस्वरूप दुख का अनुभव हुआ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)