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bhagavat 10.54.4: पतली कमर वाली रुक्मिणी ने जब अपने प्रभु की सेना को तीरों की भयंकर बारिश से घिरा हुआ देखा, तो वे भयभीत आँखों से लजाते हुए श्रीकृष्ण के चेहरे की ओर देखने लगीं।   |   bhagavat अध्याय 10.54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.54.4 
पत्युर्बलं शरासारैश्छन्नं वीक्ष्य सुमध्यमा ।
सव्रीड्‍मैक्षत्तद्वक्त्रं भयविह्वललोचना ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
पतली कमर वाली रुक्मिणी ने जब अपने प्रभु की सेना को तीरों की भयंकर बारिश से घिरा हुआ देखा, तो वे भयभीत आँखों से लजाते हुए श्रीकृष्ण के चेहरे की ओर देखने लगीं।
 
The slender-waisted Rukmini, beholding her master's army covered with a heavy shower of arrows, looked coyly at Krishna's face with frightened eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)