श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.54.35 
चैलेन बद्ध्वा तमसाधुकारीणं
सश्मश्रुकेशं प्रवपन् व्यरूपयत् ।
तावन्ममर्दु: परसैन्यमद्भ‍ुतं
यदुप्रवीरा नलिनीं यथा गजा: ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने कपड़े की पट्टी से दुष्ट व्यक्ति को बांध लिया। फिर हास्यपूर्ण ढंग से उसकी कुछ मूछें और बाल छोड़कर बाकी के सारे बाल काट कर और मुड़ कर उसे विकृत कर दिया। इसी बीच यदुवीरों ने अपने विरोधियों की अद्भुत सेना को कुचल दिया, जिस तरह हाथी कमल के फूल को कुचल देता है।
 
Lord Krishna tied up the evil-doer with a cloth (dupatta). He then made him look deformed by shaving off all his hair except a few moustaches and hair in a humorous manner. By then the brave Yadus had crushed the wonderful army of their opponents like an elephant crushes a lotus flower.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण ने अपनी उसी तीक्ष्ण तलवार से दुष्ट रुक्मी के सिर के बालों को एक अजीबोगरीब ढंग से काट दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)