श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.54.32 
द‍ृष्ट्वा भ्रातृवधोद्योगं रुक्‍मिणी भयविह्वला ।
पतित्वा पादयोर्भर्तुरुवाच करुणं सती ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई को मारने को तत्पर प्रभु श्रीकृष्ण को देख साध्वी सी रुक्मिणी भयभीत हो गई थीं। वह अपने पति के चरणों में गिरकर दयनीय स्वर में बोलीं।
 
Seeing Lord Krishna ready to kill her brother, the saintly Rukmini became very frightened. She fell at her husband's feet and spoke in a very sad voice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)