श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 54: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.54.27 
अष्टभिश्चतुरो वाहान् द्वाभ्यां सूतं ध्वजं त्रिभि: ।
स चान्यद्धनुराधाय कृष्णं विव्याध पञ्चभि: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् ने रुक्मी के चारों घोड़ों को आठ बाणों से मार गिराया, उसके सारथी को दो बाणों से मार गिराया और रथ की ध्वजा को तीन बाणों से नष्ट कर दिया। रुक्मी ने दूसरा धनुष उठाया और कृष्ण पर पाँच बाणों से प्रहार किया।
 
The Lord destroyed all four of Rukmi's horses with eight arrows, his charioteer with two arrows, and the chariot's flag with three arrows. Rukmi took up another bow and shot five arrows at Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)