श्रीशुक उवाच
उद्वाहर्क्षं च विज्ञाय रुक्मिण्या मधुसूदन: ।
रथ: संयुज्यतामाशु दारुकेत्याह सारथिम् ॥ ४ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी बोले: भगवान् मधुसूदन रूप श्री कृष्ण ने रुक्मिणी के विवाह के लिये शास्त्र सम्मत श्रेष्ठ मुहूर्त-लग्न का निश्चय किया। उन्होंने सारथी दारुक से कहा, "दारुक! तुरन्त मेरे लिये रथ तैयार करो।"
Sukadeva Goswami said: Lord Madhusudana also understood the correct time of marriage of Rukmini. So he said to his charioteer, “O Daruka, prepare my chariot immediately.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥