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bhagavat 10.53.16: विदर्भ के स्वामी भीष्मक नगर से निकले और राजा दमघोष से विशेष सत्कार के लिए प्रतीकों के साथ मिले। तत्पश्चात् भीष्मक ने दमघोष को इस अवसर के लिए खास तौर पर तैयार किए हुए आवास में ठहराया।   |   bhagavat अध्याय 10.53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.53.16 
तं वै विदर्भाधिपति: समभ्येत्याभिपूज्य च ।
निवेशयामास मुदा कल्पितान्यनिवेशने ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
विदर्भ के स्वामी भीष्मक नगर से निकले और राजा दमघोष से विशेष सत्कार के लिए प्रतीकों के साथ मिले। तत्पश्चात् भीष्मक ने दमघोष को इस अवसर के लिए खास तौर पर तैयार किए हुए आवास में ठहराया।
 
Vidarbha King Bhishmaka went out of the city and met King Damghosha with special symbols of respect. Then Bhishmaka made Damghosha stay in a residence specially built for this occasion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)