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bhagavat 10.52.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा, इस प्रकार कृष्ण के अनुग्रह से मुचुकुन्द ने उनकी परिक्रमा की और उन्हें प्रणाम किया। इसके पश्चात, इक्ष्वाकु वंश के प्रिय मुचुकुन्द गुफा के द्वार से बाहर आए।   |   bhagavat अध्याय 10.52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 52: भगवान् कृष्ण के लिए रुक्मिणी-संदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.52.1 
श्रीशुक उवाच
इत्थं सोऽनग्रहीतोऽङ्ग कृष्णेनेक्ष्वाकुनन्दन: ।
तं परिक्रम्य सन्नम्य निश्चक्राम गुहामुखात् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा, इस प्रकार कृष्ण के अनुग्रह से मुचुकुन्द ने उनकी परिक्रमा की और उन्हें प्रणाम किया। इसके पश्चात, इक्ष्वाकु वंश के प्रिय मुचुकुन्द गुफा के द्वार से बाहर आए।
 
Sukadeva Goswami said: O King, thus being kindly shown by Krishna, Muchukunda circumambulated Him and offered his obeisances. Then the beloved of the Ikshwaku clan, Muchukunda, came out of the cave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)