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श्लोक 10.50.57  |
तत्र योगप्रभावेन नीत्वा सर्वजनं हरि: ।
प्रजापालेन रामेण कृष्ण: समनुमन्त्रित: ।
निर्जगाम पुरद्वारात् पद्ममाली निरायुध: ॥ ५७ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान कृष्ण ने जब अपनी योगमाया की शक्ति से अपनी सारी प्रजा को नए नगर में पहुँचा दिया, तब उन्होंने बलराम से परामर्श किया जो मथुरा में उसकी रक्षा के लिए रुक गए थे। तब कमल के फूलों की माला पहने और बिना हथियारों के भगवान कृष्ण मथुरा से मुख्य द्वार के माध्यम से बाहर चले गए। |
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| भगवान कृष्ण ने जब अपनी योगमाया की शक्ति से अपनी सारी प्रजा को नए नगर में पहुँचा दिया, तब उन्होंने बलराम से परामर्श किया जो मथुरा में उसकी रक्षा के लिए रुक गए थे। तब कमल के फूलों की माला पहने और बिना हथियारों के भगवान कृष्ण मथुरा से मुख्य द्वार के माध्यम से बाहर चले गए। |
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| इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत पचासवाँ अध्याय समाप्त होता है । |
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