श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  10.50.47 
आवयो: युध्यतोरस्य यद्यागन्ता जरासुत: ।
बन्धून् हनिष्यत्यथवा नेष्यते स्वपुरं बली ॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
“जब हम दोनों कालयवन से युद्ध में व्यस्त होंगे, तभी यदि पराक्रमी जरासंध आ जाते हैं तो वह हमारे कुटुम्बियों का वध कर सकते हैं या फिर उन्हें बंदी बनाकर अपनी राजधानी ले जा सकते हैं।”
 
“जब हम दोनों कालयवन से युद्ध में व्यस्त होंगे, तभी यदि पराक्रमी जरासंध आ जाते हैं तो वह हमारे कुटुम्बियों का वध कर सकते हैं या फिर उन्हें बंदी बनाकर अपनी राजधानी ले जा सकते हैं।”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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