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स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
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अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना
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श्लोक 43
श्लोक
10.50.43
अष्टादशमसङ्ग्राम आगामिनि तदन्तरा ।
नारदप्रेषितो वीरो यवन: प्रत्यदृश्यत ॥ ४३ ॥
अनुवाद
जब अठारहवीं लड़ाई छिड़ने ही वाली थी, तभी कालयवन नाम का एक जंगली योद्धा नारद द्वारा भेजा गया, युद्धक्षेत्र में प्रकट हुआ।
जब अठारहवीं लड़ाई छिड़ने ही वाली थी, तभी कालयवन नाम का एक जंगली योद्धा नारद द्वारा भेजा गया, युद्धक्षेत्र में प्रकट हुआ।
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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