श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.50.41 
एवं सप्तदशकृत्वस्तावत्यक्षौहिणीबल: ।
युयुधे मागधो राजा यदुभि: कृष्णपालितै: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
मगध का राजा इसी तरह सत्रह बार हारता रहा। फिर भी इन हारों के बावजूद, वह अपनी कई अक्षौहिणी (सेनाओं) के साथ यदुवंश की उन सेनाओं के विरुद्ध लड़ता रहा, जिन्हें श्रीकृष्ण द्वारा संरक्षित किया जा रहा था।
 
मगध का राजा इसी तरह सत्रह बार हारता रहा। फिर भी इन हारों के बावजूद, वह अपनी कई अक्षौहिणी (सेनाओं) के साथ यदुवंश की उन सेनाओं के विरुद्ध लड़ता रहा, जिन्हें श्रीकृष्ण द्वारा संरक्षित किया जा रहा था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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