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श्लोक 10.50.40  |
आयोधनगतं वित्तमनन्तं वीरभूषणम् ।
यदुराजाय तत् सर्वमाहृतं प्रादिशत्प्रभु: ॥ ४० ॥ |
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| अनुवाद |
| तदनंतर भगवान कृष्ण ने यदुराज को वह सारा धन भेंट किया जो युद्ध के मैदान में गिरा था—अर्थात् मृत योद्धाओं के अनगिनत आभूषण। |
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| तदनंतर भगवान कृष्ण ने यदुराज को वह सारा धन भेंट किया जो युद्ध के मैदान में गिरा था—अर्थात् मृत योद्धाओं के अनगिनत आभूषण। |
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