श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  10.50.35-36 
मुकुन्दोऽप्यक्षतबलो निस्तीर्णारिबलार्णव: ।
विकीर्यमाण: कुसुमैस्‍त्रीदशैरनुमोदित: ॥ ३५ ॥
माथुरैरुपसङ्गम्य विज्वरैर्मुदितात्मभि: ।
उपगीयमानविजय: सूतमागधवन्दिभि: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् मुकुन्द ने अपनी पूरी सेना के साथ अपने शत्रु की सेनाओं के सागर को पार कर लिया। स्वर्ग के निवासियों ने उन पर फूलों की वर्षा करते हुए उनकी जीत के लिए बधाई दी। मथुरा के लोग अपनी चिंता से मुक्त होकर और खुशी से भरकर उनसे मिलने आये और सूतधारों, गायकों और प्रशंसकों ने उनकी जीत का गुणगान किया।
 
भगवान् मुकुन्द ने अपनी पूरी सेना के साथ अपने शत्रु की सेनाओं के सागर को पार कर लिया। स्वर्ग के निवासियों ने उन पर फूलों की वर्षा करते हुए उनकी जीत के लिए बधाई दी। मथुरा के लोग अपनी चिंता से मुक्त होकर और खुशी से भरकर उनसे मिलने आये और सूतधारों, गायकों और प्रशंसकों ने उनकी जीत का गुणगान किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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