श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.50.34 
हतेषु सर्वानीकेषु नृपो बार्हद्रथस्तदा ।
उपेक्षितो भगवता मगधान् दुर्मना ययौ ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
अपनी सारी सेना के मारे जाने और स्वयं को भगवान द्वारा उपेक्षित पाकर, बृहद्रथ के पुत्र, राजा जरासंध दुखी मन से अपने राज्य मगध लौट आए।
 
अपनी सारी सेना के मारे जाने और स्वयं को भगवान द्वारा उपेक्षित पाकर, बृहद्रथ के पुत्र, राजा जरासंध दुखी मन से अपने राज्य मगध लौट आए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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