श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.50.30 
जग्राह विरथं रामो जरासन्धं महाबलम् ।
हतानीकावशिष्टासुं सिंह: सिंहमिवौजसा ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
रथ खो देने और सभी सैनिकों के मर जाने के बाद जरासंध के पास केवल प्राण शेष थे। उस समय बलराम जी ने उस शक्तिशाली योद्धा को उसी तरह पकड़ लिया जिस तरह एक शेर दूसरे शेर को पकड़ लेता है।
 
रथ खो देने और सभी सैनिकों के मर जाने के बाद जरासंध के पास केवल प्राण शेष थे। उस समय बलराम जी ने उस शक्तिशाली योद्धा को उसी तरह पकड़ लिया जिस तरह एक शेर दूसरे शेर को पकड़ लेता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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